खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं,

न खाकर बनेगा अहंकारी।

सम खा तभी होगा समभावी,

खुलेगी साँकल बंद द्वार की।

'सम खा' से कवयित्री का क्या तात्पर्य है?

1
योग का मार्ग अपनाने से
2
योग और त्याग के बीच का मध्यम मार्ग अपनाने से
3
केवल त्याग का मार्ग अपनाने से
4
सभी की समान रूप से सेवा करने से

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