Comprehension Passage

निर्देशः निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

उपयुक्त उस खल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है,

पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है।

अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मैं,

तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं।

अथवा अधिक कहना वृथा है, पार्थ का प्रण है यही,

साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर, यही।

सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथे वध करूँ,

तो शपथ करता हूँ स्वयं मैं ही अनल में जल मरूँ।

"कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं।" पंक्ति का भावार्थ है -

1
युद्ध ना करना
2
क्षत्रिय धर्म का त्याग
3
राजभवन में बैठना
4
आत्मदाह करना

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