दैनिक जीवन में हम अनेक लोगों से मिलते हैं जो विभिन्न प्रकार के काम करते हैं - सड़क पर ठेला लगाने वाला, दूधवाला, नगर निगम का सफाईकर्मी, बस कंडक्टर, स्कूल अध्यापक, हमारा सहपाठी और ऐसे ही कई अन्य लोग। शिक्षा, वेतन, परंपरागत चलन और व्यवसाय के स्तर पर कुछ लोग निम्न स्तर पर कार्य करते हैं, तो कुछ उच्च स्तर पर। एक माली के कार्य को सरकारी कार्यालय के किसी सचिव के कार्य से अति निम्न स्तर का माना जाता है, किंतु यदि यही अपने कार्य को कुशलतापूर्वक करता है और उत्कष्ट सेवाएँ प्रदान करता है तो उसका कार्य उस सचिव के कार्य से कहीं बेहतर है, जो अपने काम में ढिलाई बरतता है तथा अपने उत्तरदायित्वों का निर्वाह नहीं करता। क्या आप ऐसे सचिव को एक आदर्श अधिकारी कह सकते हैं? वास्तव में पद महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण होता है कार्य के प्रति समर्पण का भाव और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता।
इस सन्दर्भ में गांधी जी से उत्कृष्ट उदाहरण और किसका दिया जा सकता है, जिन्होंने अपने हर कार्य को गरिमामय मानते हुए किया। वे अपने सहयोगियों को श्रम की गरिमा की सीख दिया करते थे। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय लोगों के लिए संघर्ष करते हुए उन्होंने सफाई करने जैसे कार्य को भी कभी नीचा नहीं समझा और इसी कारण स्वयं अपनी पत्नी कस्तूरबा से भी उनके मतभेद हो गये थे।
बाबा आमटे ने समाज द्वारा तिरस्कृत कुष्ठ रोगियों की सेवा में अपना समस्त जीवन समर्पित कर दिया। सुन्दरलाल बहुगुणा ने अपने प्रसिद्ध ‘चिपको आंदोलन’ से पेड़ों को संरक्षण प्रदान किया। फादर डेमियन ऑफ़ मोलोकाई, मार्टिन लूथर किंग और मदर टेरेसा जैसी महान आत्माओं ने इसी सत्य को ग्रहण किया। इनमें किसी ने भी सत्ता प्राप्त नहीं की, बल्कि अपने जनकल्याण कारी कार्यों से लोगों के दिलों पर शासन किया। गाँधी जी का स्वतंत्रता के लिए संघर्ष उनके जीवन का एक पहलू हैं, किन्तु उनका सामाजिक मानसिक क्षितिज वास्तव में एक राष्ट्र की सीमाओं में बँधा हुआ नहीं था। उन्होंने सभी लोगों में ईश्वर के दर्शन किए। यही कारण था कि कभी पंचायत तक के सदस्य नहीं बनने वाले गाँधी जी की जब मृत्यु हुई, तो अमेरिका का राष्ट्रध्वज भी झुका दिया गया था।
उपर्युक्त अवतरण में किस सन्दर्भ को मुखरित किया है जिसके कारण गाँधी जी का अपनी पत्नी से मतभेद हो गया था?