निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्न के उत्तर दीजिए।
यों तो सृष्टि के आरंभ से मानव ज्ञान–विस्तार में प्रवृत्त है, किन्तु 19वीं और 20वीं सदी तो विज्ञान की चरमोन्नति के काल रहे हैं। आज 21वीं सदी भी, विज्ञान के सृष्टि विजयी रथ को और तीव्रता से दौड़ाने में पीछे नहीं है। मनुष्य पर विज्ञान के अनन्त उपकार हैं। आज ऐसा शायद ही कोई क्षेत्र है, जिसे विज्ञान ने अपने उपकारों से कृतज्ञ न बनाया हो। पाताल से लेकर अन्तरिक्ष तक विज्ञान की महिमा का गान हो रहा है।
विज्ञान का वरदानी स्वरूप, मानव के लिए हर मनोकामना की पूर्ति करने वाला कल्पवृक्ष बना हुआ है। विज्ञान ने मानव को प्रकृति पर निर्भरता से मुक्त कर उसे अकल्पनीय सुख–सुविधाएँ और सुरक्षा उपलब्ध कराई है। आज रासायनिक खादों, उन्नत बीजों, कृषि–यन्त्रों, बाँधों, नहरों और कृत्रिम वर्षा की सौगात देकर विज्ञान मानव के कृषि–भण्डार को भर रहा है। कहीं नाना प्रकार की गृह–निर्माण सामग्री और शिल्पीय ज्ञान से मानव के विलास– भवनों की रचना कर रहा है, तो वही मानव तन को मनमोहक, कृत्रिम और पम्परागत वस्त्रों से अलंकृत भी कर रहा है।
चिकित्सा क्षेत्र में भी विज्ञान- क्षय,कैंसर, कुष्ठ तथा एड्स जैसे भयंकर रोगों पर विजय पाने में संघर्षरत है। मस्तिष्क, हृदय और गुर्दो को प्रत्यारोपित कर, अमरता की मंजिल को प्रशस्त कर रहा है।
संचार के क्षेत्र में- रेडियो, मोबाइल फोन, टेलीफोन, टेलीविजन और इण्टरनेट जैसे उपकरणों से विज्ञान ने सारे विश्व को सिकोड़कर छोटा कर डाला है। रेडियो–दूरबीनों से यह ब्रह्माण्ड की छानबीन कर रहा है, वसुन्धरा के गर्भ में झाँक रहा है, सागरों के अतल तल को माप रहा है। इतना ही नहीं मनोरंजन के अनेक साधनों के साथ, व्यापार के क्षेत्र में भी विज्ञान ई–मेल, ई–बैंकिंग जैसे साधन उपलब्ध करायें हैं।