Comprehension Passage
नव- किरण का रथ सजा है,
कलि-कुसुम से पथ सजा है,
बादलों से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाक धारी ।
आ रही रवि की सवारी !
विहग बंदी और चारण,
गा रहे हैं कीर्ति - गायन,
छोड़कर मैदान भागी तारकों की फौज सारी !
आ रही रवि की सवारी !
चाहता, उछलूँ विजय कह,
पर ठिठकता देखकर यह
रात का राजा खड़ा है राह में बनकर भिखारी !
आ रही रवि की सवारी !
कलि-कुसुम से पथ सजा है,
बादलों से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाक धारी ।
आ रही रवि की सवारी !
विहग बंदी और चारण,
गा रहे हैं कीर्ति - गायन,
छोड़कर मैदान भागी तारकों की फौज सारी !
आ रही रवि की सवारी !
चाहता, उछलूँ विजय कह,
पर ठिठकता देखकर यह
रात का राजा खड़ा है राह में बनकर भिखारी !
आ रही रवि की सवारी !
कविता में 'रात का राजा' किसे कहा गया है?
1
सूर्य
2
चंद्रमा
3
तारे
4
बादल