निर्देशः नीचे दिये गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िये तथा उसके नीचे दिये गये प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिये-
संवेदना, एक ऐसा शब्द जो मानवता के सार को व्यक्त करता है, मानव हृदय की वह अद्भुत क्षमता जिसके माध्यम से वह अन्य के दुख-सुख को महसूस कर सकता है। मानवीय संवेदना वह धागा है जो व्यक्ति को समाज के साथ बांधे रखता है, यह एकता और प्रेम का प्रतीक है। वास्तव में, संवेदना मानवीय अस्तित्व की ऐसी बुनियादी बात है जिसके बिना मानवता का कोई अर्थ नहीं रहता।
संस्कृत में संवेदना को 'संवेदना' कहा गया है और इसके अनेक पहलू हैं [0]. प्राचीन भारतीय दर्शन में संवेदना को व्यापकता के साथ देखा गया है, जो मनुष्य के आंतरिक जगत और उसके संपूर्ण ज्ञान की यात्रा को प्रदर्शित करता है। इसी प्रकार, आधुनिक समय में भी यह शिक्षा और समाजिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है।
हमारे आस-पास की दुनिया में असंख्य समस्याएँ हैं - गरीबी, असमानता, बीमारी, और पर्यावरणीय संकट जैसी, जिनका समाधान मानवीय संवेदना के बिना संभव नहीं। एक दूसरे के प्रति संवेदनशीलता, सहानुभूति और सहयोग ही हमें इन समस्याओं का समाधान खोजने में सक्षम बनाते हैं।
तो, मानवीय संवेदना सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि एक नैतिक धर्म है, जो हमें सिखाता है कि किस प्रकार हमें अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाना है, समाज की बेहतरी के लिए काम करना है और उसे अधिक समृद्ध बनाना है। इसलिए, यह हमारा दायित्व बनता है कि हम न केवल स्वयं के लिए जीवन जिएं, बल्कि दूसरों की जिंदगियों में भी खुशियाँ भरें। मानवीय संवेदना हमें यह शिक्षा देती है कि सच्चा सुख और संतोष दूसरों की मदद करने में ही निहित है।