Comprehension Passage
निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिएः (प्र-81-85)
देखो प्रिय, विशाल विश्व को आंख उठाकर देखो,
अनुभव करो हृदय से यह अनुपम सुषमाकर देखो।
यह सामने अथाह प्रेम का सागर लहराता है,
कूद पडूं तैरूं इसमें, ऐसा जी में आता है।।
रत्नाकर गर्जन करता है मलयानिल बहता है,
हरदम यह हौसला हृदय में प्रिये! भरा रहता है।
इस विशाल, विस्तृत, महिमामय रत्नाकर के घर के,
कोने-कोने में लहरों पर बैठ फिरूं जी भर के।।
निकल रहा है जलनिधि-तल पर दिनकर-बिंब अधूरा,
कमला के कंचन-मंदिर का मानो कांत कंगूरा।
लाने को निज पुण्यभूमि पर लक्ष्मी की असवारी,
रत्नाकर ने निर्मित कर दी स्वर्ण-सड़क अति प्यारी।।
सागर सा गम्भीर हृदय हो, सदा रहो हितकारी।
गगन चुम्बी हो पाएगी तब ही दुनिया सारी ।।
उगते हुए सूर्य की कवि ने किस रूप में कल्पना की है?
1
लक्ष्मी के मंदिर के चमकते हुए कलश के रूप में
2
लक्ष्मी के मंदिर के चमकते अधूरे गुम्बद के रूप में
3
लक्ष्मी के सोने से बने मंदिर के चमकते बिम्ब के रूप में
4
लक्ष्मी के शीशे के मंदिर के चमकते हुए गुंबद के रूप में