निर्देशः निम्नलिखित अनुच्छेद में से कुछ शब्द निकाल दिये गए हैं। अनुच्छेद को पढ़कर उसका विषय समझिए और दिये गए विकल्पों में से उचित विकल्प चुनिए तथा निर्देशानुसार चिह्न लगाइए। (प्र-71-80)
मनुष्य सभी वस्तुओं का प्रतिमान है। केवल उसी की प्रकृति ऐसी है जिसमें पदार्थ से लेकर परमात्मा तक के प्रकृत स्वरूप के प्रत्येक स्तर का समावेश होता है। मनुष्य अपने - (1) - शरीर से अपने आप को पृथक कर सकता है और एक - (2) - चेतना को प्राप्त कर सकता है जो उसके - (3) - आत्म तत्व की प्रकृति दिशा है। अनवरत अभ्यास एवं - (4)-के द्वारा मनुष्य चाहे तो स्वयं को अपनी विशुद्धसत्ता तक अथवा उस कर्ता तक जो अपने को सबसे - (5) – करता है, ले जा सकता है और उस व्यवधान हीनता तथा - (6) – की स्थिति में पहुंच सकता है, जिसमें जाकर सब - (7) - समाप्त हो जाते
हैं। - (8) - धर्म का यह मूलभूत सत्य है कि हमारी आत्मा अपने - (9) - रूप में परमात्मा रूप का - (10) - करे और प्रबुद्ध होकर अपने को वही समझने लगे। यह समझना मनुष्य को ‘एकोडाहं बहुस्याम’की स्थिति में पहुंचा देगा।