माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोय।।
उपरोक्त दोहे से कबीर क्या संदेश देना चाहते हैं?
1
शरीर नश्वर है, एक दिन मिट्टी में मिल जायेगा।
2
समय आने पर मिट्टी सभी को रौंदती है।
3
संसार में सभी को अवसर मिलता है, सब समय पर निर्भर करता है।
4
जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी को किसी भी आकार में मोड़ देता है, उसी प्रकार इंसान को भी अपने को मोड़ना चाहिए।