बाजार में, विज्ञापन ने हिंदी को एक क्रांतिकारी रूप दिया जिसमें रवानगी है, स्वाद है, रोमांच है, आज की सबसे बड़ी चाहत का अकूत संसार है। इस तरह हिंदी भविष्य की भाषा, समय का तकाजा और रोजगार की जरूरत बनती जा रही है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता है। सूचना क्रांति ने विश्व को ग्राम बना दिया है। मीडिया की जागरूकता ने समाज में एक क्रान्ति ला दी है और इस क्रान्ति की भाषा हिंदी है। इतने सारे समाचार चैनल हैं और सभी चैनलों पर हिंदी अपने हर रूप में नए कलेवर, तेवर में निखरकर, संवरकर, लहरकर अर्थात बिंदास बनकर छाई रहती है। तुलनात्मक अर्थों में आज अंग्रेजी पत्रकारिता का मूल्य, बाजार, उत्पादन, उपभोग और वितरण बहुत बड़ा है।
प्रिंट मीडिया की स्थिति ज्यादा बेहतर है। पत्र-पत्रिकाओं की लाखों प्रतियां रोजाना बिकती है। चीन के बाद सबसे अधिक अख़बार हमारे यहाँ पढ़े जाते हैं। हिंदी के सर्वेक्षण की यह मानवीय, रचनात्मक और सारगर्भित उपलब्धि है। पत्र-पत्रिकाएं हिंदी की गुणवत्ता और प्रचार-प्रसार के लिए कृत संकल्प हैं।
यह भ्रम फैलाया गया था कि हिंदी रोजगारोन्मुखी नहीं है। आज सरकारी, गैर-सरकारी क्षेत्रों में करोड़ों हिंदी पढ़े लिखे लोग आजीविका कमा रहे हैं। भविष्य में हिंदी की बाजार मांग और अधिक होगी। पसीनों में, प्रार्थनाओं में, सिरहानों की सिसकियों में और हमारे सपनों में रहेगी, तब तक वह बिना किसी पीड़ा या रोग के सप्राण, सवाक और सस्वर रहेगी।
दिए गये गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सही उत्तर दीजिए :-