Comprehension Passage
निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
दुर्योधन वह भी दे न सका, आशिष समाज की ले न सका,
उलटे, हरि को बाँधने चला, जो था असाध्य, साधने चला।
जब नाश मनुज पर छाता है
पहले विवेक मर जाता है
हरि ने भीषण हुँकार किया, अपना स्वरूप विस्तार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान कुपित होकर बोले ।
“जंजीर बढ़ाकर साध मुझे,
हाँ-हाँ दुर्योधन ! बाँध मुझे
यह देख गगन मुझमें लय है, यह देख पवन मुझमें लय है,
मुझमें विलीन झंकार सकल, मुझमें लय है संसार सकल ।
सब जन्म मुझी से पाते हैं -
फिर लौट मुझी में आते हैं। "
इस पद्यांश में मुख्यतः वर्णित है
1
कृष्ण का प्रेम।
2
दुर्योधन का विनय।
3
प्रकृति चित्रण।
4
हरि की विराट शक्ति।
5
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