Comprehension Passage
लुटा गया है कौन जौहरी
अपने घर का भरा खजाना?
पत्तों पर, फूलों पर, पगपग
बिखरे हुए रतन हैं नाना ।
बड़े सबेरे मना रहा है
कौन खुशी में ये दिवाली?
वन उपवन में जला दी है
किसने दीपावली निराली?
जी होता इन ओस कणों को
अंजलि में भर, घर ले जाऊँ
इनकी शोभा निरख निरख कर
इन पर कविता एक बनाऊँ ।
उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर नीचे पूछे जाने वाले प्रश्न का उत्तर बताइए ।कवि की क्या इच्छा है?
1
इनमें से कोई नहीं
2
ओस कणों के सौन्दर्य को अपनी हथेली में लेकर बगीचे में जाऊं
3
ओस कणों के सौन्दर्य को अपनी हथेली में लेकर घर जाऊं
4
बागों में नाचूँ
5
उत्तर नहीं देना चाहते