Comprehension Passage

दिए गए गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए।

बहिष्कार आंदोलन केवल विलायती वस्तुओं के उपयोग तक सीमित नहीं था बल्कि इसका स्वरुप बहुत व्यापक था और उसमें ब्रिटिश सरकार द्वारा दी हुई उपाधियों और सरकारी पदों का त्याग और कौंसिलों तथा स्कूलों का बहिष्कार भी शामिल था। इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार को बंगाल के विभाजन को समाप्त करने तथा दमन को रोकने के लिए बाध्य करना था। वस्तुत: बहिष्कार आंदोलन का उद्देश्य लोगों के अंदर स्वराज्य प्राप्त करने के लिए एक जुझारू संकल्प पैदा करना था। इस आंदोलन के पुरस्कर्ताओं का त्याग और बलिदान इतना बड़ा था कि वह जनता के आदर्श और घर-घर में परिचित नाम बन गए थे। इनमें से तिलक तो स्वतंत्रता के लड़ने वाले और राजनीतिक दमन के प्रतीक बन गए थे। विभाजन के विरोध में छिड़े अभियान में स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के नारे भी लगाये गये। सरकार ने इसका दमन करने के लिए कड़े कदम उठाये। नेताओं, सम्पादकों, प्रचारकों और संगठन कर्ताओं को जेल भेज दिया गया। इस दमन के विरोध में बंगाल, महाराष्ट्र और पंजाब में आतंकवादी गतिविधियाँ भी तेज हो गयीं। 1907 में कांग्रेस में उदारवादियों और जुझारु राष्ट्रवादियों में विभाजन हो गया। इसके बाद सरकारी दमन और भी तेज हो गया। 1907 में 'सेडिशस मीटिंग ऐक्ट' और 1910 में 'इण्डियन प्रेस ऐक्ट' लागू किए गये। पर दमनात्मक कारवाईयों के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। इसके प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने 1909 में मार्लें-मिंटो रिफार्म लागू किये। इसका नरमपंथियों ने स्वागत किया।

इण्डियन प्रेस ऐक्ट कब लागू हुआ?

1
1810
2
1910
3
1907
4
1807
5
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