"सगुण अलंकारन सहित दोष रहित जो होइ।
शब्द अर्थ ताको कवित विबुध कहत सब कोइ II"
'काव्य' के संदर्भ में उक्त मत किस रीतिकालीन आचार्य का है?
1
श्रीपति
2
केशवदास
3
आचार्य चिंतामणि
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भिखारीदास
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"सगुण अलंकारन सहित दोष रहित जो होइ।
शब्द अर्थ ताको कवित विबुध कहत सब कोइ II"
'काव्य' के संदर्भ में उक्त मत किस रीतिकालीन आचार्य का है?