पिउ सो कहहु संदेसड़ा हे भौंरा हे काग !

सो धनि बिरहें जर मुई तेहिक धुआँ हम लाग।।

यह पंक्ति किस सूफी कवि की है?

1
कुतुबन
2
मंझन
3
जायसी
4
उस्मान
5
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