सदियों की ठंढी बुझी राख सुगबुगा उठी,

मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;

दोरा, समय के रथ का घर्घर - नाद सुनो,

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।"

सही कथन चुनिए

1
प्रस्तुत पंक्ति यह दीप अकेला' कविता से है।
2
प्रस्तुत पंक्ति सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की है।
3
प्रस्तुत पंक्ति में कवि लोकतंत्र में जनता को सर्वोपरि बतला रहा है।
4
प्रस्तुत पंक्ति छायावाद से सम्बंधित है।
5
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