काव्य-गुण के विषय में गलत कथन है
1
आचार्य मम्मट के अनुसार गुण रस के उत्कर्ष के कारण रूप धर्म हैं।
2
आचार्य भरत ने गुणों की संख्या आठ मानी है।
3
जिसमें स्वच्छता, सरलता और सहजग्राह्यता हो, प्रसाद गुण कहलाता है।
4
माधुर्य गुण का संबंध शृंगार, करुण और शांत रसों से होता है।