Comprehension Passage

उषा की लाली में
अभी से गए निखर
हिमगिरि के कनक शिखर !

आगे बढ़ा शिशु रवि
बदली छवि, बदली छवि
देखता रह गया अपलक कवि
डर था, प्रतिपल
अपरूप यह जादुई आभा
जाए ना बिखर, जाए ना बिखर......

उषा की लाली में
अभी से गए निखर
हिमगिरि के कनक शिखर !....पंक्तियों मे नाद है:-

1
उषा की लाली
2
शिखर
3
हिमगिरी
4
कनक निखर

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