Comprehension Passage
यहाँ रोज़ कुछ बन रहा है
रोज़ कुछ घट रहा है
यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं
एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया
जैसे वसन्त का गया पतझड़ को लौटा हूँ
जैसे बैशाख का गया भादों को लौटा हूँ
अब यही उपाय कि हर दरवाज़ा खटखटाओ
और पूछो-क्या यही है वो घर?
समय बहुत कम है तुम्हारे पास
आ चला पानी ढहा आ रहा अकास
शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देख कर
उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर बताइए:
प्रस्तुत कविता में कवि किस बात से व्याकुल है?
1
केवल नवीनीकरण
2
केवल अजनबियत
3
केवल बदलते परिवेश
4
उपरोक्त सभी