Comprehension Passage

निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-

प्यारी छबि की रासि बनी।

जाहि बिलोकि निमेष न लाग्त श्री वृषभानु-जनी॥

नंद-नंदन सों बाहु मिथुन करि ठाढ़ी जमुना-तीर।

करक होत सौतिन के छबि लखि सिंह-कमर पर चीर॥

कीरति की कन्या जग-धन्या अन्या तुला न बाकीI

वृश्चिक सी कसकति मोहन हिय भौंह छबीली जाकी॥

धन धन रूप देखि जेहि प्रति छिन मकरध्वज-तिय लाजै।

जुग कुच-कुंभ बढ़ावत सोभा मीन नयन लखि भाजै॥

बैस संधि संक्रौन समय तन जाके बसत सदाई।

'हरिचंद' मोहन बढ़भागी जिन अंकम करि पाई॥

लोकोक्ति 'अंधों के आगे रोना, अपना दीदा खोना' का सही अर्थ बताइए-

1
मूर्खों की कमाई व्यर्थ में नष्ट हो जाती है।
2
मनचाही बात हो जाना
3
बुद्धिहीन, किन्तु धनवान
4
मूर्खो को सदुपदेश देना या अच्छी बात बताना व्यर्थ है।

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