दिवस का अवसान समीप था, गगन था कुछ लोहित हो चला I
तरु शिखा पर थी जब राजती, कमलिनी-कुल-वल्लभ का प्रभा I पंक्तियाँ किस कवि की है?
1
नागार्जुन
2
अयोध्या सिंह उपाध्याय
3
निराला
4
जयशंकर प्रसाद
दिवस का अवसान समीप था, गगन था कुछ लोहित हो चला I
तरु शिखा पर थी जब राजती, कमलिनी-कुल-वल्लभ का प्रभा I पंक्तियाँ किस कवि की है?