चिरजीवौ जोरी जुरै क्यों न सनेह गंभीर ।
को घटि ए वृषभानुजा, वे हलधर के बीर ।।
इस दोहे में है
1
अभिधामूला शाब्दी व्यंजना
2
लक्षणामूला शाब्दी व्यंजना
3
प्रयोजनवती सारोपा लक्षणा
4
गौणी साध्यवसाना लक्षणा
चिरजीवौ जोरी जुरै क्यों न सनेह गंभीर ।
को घटि ए वृषभानुजा, वे हलधर के बीर ।।
इस दोहे में है