Comprehension Passage

निर्देश: निम्नलिखिम गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह सदैव अपनी इच्छापूर्ति में लगा रहता है। मगर इच्छाएँ कभी पूर्ण नहीं होती हैं। एक इच्छा की पूर्ति होती है, तो दूसरी जन्म लेती है इस प्रकार इच्छाओं का अनवरत क्रम चलता रहता है। यही इच्छाएँ ही मनुष्य के दुःख का कारण होती है। यदि हमें सच्चा सुख पाना है, तो अपनी इच्छाओं का दमन करना होगा। भारतीय मनीषियों ने कहा था - जीवन में सफलता की प्राप्ति के लिए जिन गुणों को आवश्यक माना जाता है, उनमें संतोष का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत के ऋषियों ने लोभ को मानव का शत्रु कहा है। काम, क्रोध, लोभ और मोह को जीवन के विनाश का द्वार माना जाता है। संतोष द्वारा लोभ से मुक्ति मिलती है। संतोष के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति महापुरुष बन सकता है।

'महापुरूष' में समास है 

1
अव्ययीभाव
2
तत्पुरुष
3
कर्मधारय
4
बहुब्रीहि

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