दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न का सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।
मनुष्य की विशेषता उसके चरित्र में है। यदि एक मनुष्य को दूसरे से अधिक आदरणीय समझा जाता है तो वह अपने चरित्र के कारण। मनुष्य का आदर उसके पद, धन या विद्या के कारण भी होता है, किंतु ये सब चीजें एक प्रकार से बाह्य हैं। पद स्थायी नहीं होता है यदि वह स्थायी हो भी तो उसके लिए जो आदर होता है वह भयजन्य होने के कारण श्लाघनीय नहीं है। धन का आदर वही करेगा जिसको धनी से कुछ लाभ उठाने की इच्छा हो । विद्या का मान अवश्य ऐसा है जो वास्तव में अपने कारण कहा जा सकता है, किंतु वह भी विनय और चरित्र के बिना चिरस्थायी नहीं होता । विद्या, धन, बल तथा पद के होते हुए भी चरित्र के अभाव में वह पूजा न जा सका। इसलिए मनुष्य की वास्तविक महत्ता उसके चरित्र में है । चरित्र के द्वारा ही मनुष्य की आत्मा का मूल्य आँका जा सकता है । चरित्र में ही आत्मबल का प्रकाश दिखाई देता है। यह चरित्र क्या है जो इतना महत्व रखता है? यह चरित्र उन गुणों का समूह है। जो हमारे व्यावहारिक जीवन से संबंध रखते हैं। विनय, उदारता, धैर्य, निर्भय होकर सत्य बोलना, लालच में न पड़ना एवं अपने कर्त्तव्य पर दृढ़ रहना, यह सब गुण चरित्र में आते हैं। यद्यपि चरित्र के अंतर्गत और भी बहुत से गुण हैं। तथापि उपर्युक्त गुणों का होना आवश्यक हैं।