सुमेलित कीजिए :

(क)

जो घनीभूत पीड़ा थी

मस्तक में स्मृति-सी छायी

दुर्दिन में आँसू बनकर

वह आज बरसने आयी।

(i)

रूपक

(ख)

विरह विकल बिनुही लिखी

पाती दई पठाय।

आँक विहीनीयौ सुचित,

सूने बाँचत जाय।।

(ii)

श्लेष

(ग)

अरुन सरोरुह कर चरण

दृग खंजन मुखचन्द।

समै आय सुन्दरि सरद

काहि न करति अनंद।।

(iii)

असंगति

(घ)

मेरे जीवन की उलझन

बिखरी थी उनकी अलकें

पी ली मधु मदिरा किसने

थी बंद हमारी पलकें।

(iv)

विभावना

1
(क) - (ii), (ख) - (iv), (ग) - (i), (घ) - (iii)
2
(क) - (ii), (ख) - (i), (ग) - (iv), (घ) - (iii)
3
(क) - (iii), (ख) - (iv), (ग) - (i), (घ) - (ii)
4
(क) - (i), (ख) - (ii), (ग) - (iv), (घ) - (iii)

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