Comprehension Passage

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी

छवियों की चित्र-गंध फैली मनभावनी;

तन- सुगंधशेष रही, बीत गई यामिनी,

कुंतल के फूलों की याद बनी चाँदनी।

भूली सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

यश है या न वैभव है, मान है न सरमाया;

जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया।

प्रभुता का शरण बिंब केवल मृगतृष्णा है,

हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।

जो है यथार्थ कठिन उसका तू कर पूजन

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

उपर्युक्त पद्यांश को पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्न का उत्तर बताइये:

प्रस्तुत कविता में कवि ने मनुष्य को किस ओर ध्यान न लगाने को कहा है?

1
इनमें से कोई नहीं
2
अतीत
3
भूतकाल
4
भविष्य

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