नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
अधिकांश देशों में शिक्षा की आधुनिक राष्ट्रीय प्रणाली सैद्धांतिक और कागज़ी स्तर पर बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए प्रतिबद्ध होती है, लेकिन व्यवहार में स्कूली शिक्षा विरले ही ऐसे मौके और बौद्धिक साधन देती है । जिससे बच्चे अपने समाजीकृत अन्तस पर विचार कर पाएं। साधारणतः शिक्षा की ये प्रणालियाँ बच्चों की चिन्तनपरक क्षमताएँ विकसित करने की बजाए उनमें वफ़ादार नागरिक के लक्षणों को परिष्कृत करने में लगी रहती हैं। जहाँ तक अतीत की पढ़ाई से संबंध है, विभिन्न शिक्षा प्रणालियाँ बच्चों को एक स्वीकृत राष्ट्रीय अतीत में समाजीकृत करने का कार्य करती हैं। परिवार में संपन्न होने वाले प्राथमिक सामाजीकरण से भिन्न, द्वितीयक सामाजीकरण की संस्था की तरह स्कूल राष्ट्र के अतीत का स्वीकृत ज्ञान बच्चों को देता है। किसी भी देश में प्रचलित परिस्थितियों के अनुसार यह भूमिकाएँ कानून के पालन से लेकर युद्ध के समय देश के लिए लड़ मरने तक की हो सकती हैं।