निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही / सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
हम में से जिन्हें सर्वोत्तम शिक्षा और सर्वोत्तम मानसिक शक्तियाँ मिली हैं, उन पर समाज के प्रति उतना ही उत्तरदायित्व भी है। वह मानसिक पूँजीपति पूजा के योग्य नहीं है जो ऊँची शिक्षा प्राप्त कर उसे स्वार्थ साधन में लगाता है । समाज से निजी लाभ उठाना ऐसा काम है, जिसे कोई साहित्यकार कभी पसंद न करेगा। उस मानसिक पूँजीपति का कर्तव्य है कि वह समाज के लाभ को अपने निज लाभ से अधिक ध्यान देने योग्य समझे । जिन्हें धन-वैभव प्यारा है, साहित्य - मंदिर में उनके लिए स्थान नहीं है। यहाँ तो उन उपासकों की आवश्यकता है, जिन्होंने सेवा को ही अपनी सार्थकता मान लिया हो। अगर हम सच्चे दिल से समाज की सेवा करेंगे तो मान, प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि सभी हमारे पाँव चूमेंगी। फिर मान - प्रतिष्ठा के न मिलने से हम निराश क्यों हों ? सेवा में जो आध्यात्मिक आनन्द है, वही पुरस्कार है । हम साहित्यकार समाज का झण्डा लेकर चलने वाले सिपाही हैं । साहित्य वही खरा है, जिसमें उच्च चिन्तन हो, सौंदर्य का सार हो, सृजन की आत्मा हो ।