निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही / सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।
देश - प्रेम, प्रेम का वह अंश है जिसका आलंबन है सारा देश - उसमें व्याप्त प्रत्येक कण अर्थात् - मनुष्य, पक्षी, नाले, नदी, वन, पर्वत आदि। यह एक साहचर्यगत प्रेम है जिसके सान्निध्य के हम आदी हो जाते हैं। उनके प्रति लोभ या राग हो जाता है। कोई भी व्यक्ति सच्चा देश प्रेमी तभी कहा जा सकता है जब वह देश के प्रत्येक मनुष्य, पशु - पक्षी, लता गुल्म, पेड़ - पत्ते, पर्वत, नदी आदि सभी के प्रति अपनत्व की भावना रखता है। जो व्यक्ति राष्ट्र के मूलभूत जीवन को भी नहीं जानता हो उसके बाद भी देश - प्रेमी होने का दावा करे तो वह उसकी भूल है। परिचय से प्रेम की उत्पत्ति होती है। आपके अंतःकरण में राष्ट्र - प्रेम के भाव उजागर हैं तो आप राष्ट्र के स्वरूप से परिचित हो जाएँगे।