नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
माता - पिता की एक अजीब सी आदत की तरफ़ मैं यहाँ उनका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ। प्रायः वे अपने घर आए मेहमानों या मित्रों के सामने अपने बालकों से कुछ बोलने, गाने के लिए कहते हैं। ऐसा करने से शायद मित्र तो खुश हो जाएँ, लेकिन इससे बालक दिखावे बाज बन जाता है। उसकी यह आदत पड़ जाती है कि जब कोई प्रशंसा करके देखने वाला हो, तभी उसे अपना काम करना अच्छा लगता है। कई माता - पिता अपने बालकों पर इसलिए नाराज होते हैं कि उनके बालक अपनी विद्या दिखाने से इनकार करते हैं। वे बालकों को इनाम देकर उनसे काम करवाने की कोशिश करते हैं या नाराज होकर बालकों की पिटाई कर देते हैं। हम बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध दूसरों को प्रसन्न करने के लिए मजबूर क्यों करें? बालक को जो कुछ आता - जाता है, उसका आनन्द उसके अपने ज्ञान में निहित रहता है, बालक न प्रशंसा चाहते हैं, न निन्दा। स्वाभाविक स्थितियों में सीखने वाले बालकों में स्वयं को पहचानने की क्षमता स्वत: विकसित होने लगती है। जब हम अपनी पसन्द - नापसन्द को उस पर लादने लग जाते हैं तो वे आत्मोन्मुखी के मार्ग से विपरीत जाने लगते हैं।