सींचें ही बस मालिनें, कलश लें, कोई न ले कर्तरी,
शाखी फूल फलें यथेच्छ बढ़के, फैलें लताएँ हरी। 

उपर्युक्त पंक्ति से स्पष्ट है कि-

1
लक्ष्मण के प्रति पूज्य भाव रखना चाहती है। 
2
उर्मिला के एकाकीपन की ओर संकेत किया गया है। 
3
शोकाकुल उर्मिला चराचर को प्रसन्न देखना चाहती है। 
4
उर्मिला के ऋतु वर्णन का चित्रण किया गया है। 
5
अनुत्तरित प्रश्न

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