‘कनक कनक तैं सौ गुनी, मादकता अधिकाइ ।

उहिं खाएँ बौराई जग, इहिं पाएँ बौराई ।।

उक्त दोहे का अभिप्रेत अर्थ है -

1
धुतरे में बहुत नशा होता है ।
2
धुतरा खाने से आदमी बावला हो जाता है ।
3
सोना छूने से आदमी बावला हो जाता है ।
4
धन-दौलत पाने मात्र से आदमी बावला हो जाता है ।
5
अनुत्तरित प्रश्न

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation