"आओ बैठो : क्षण भर तुम्हें निहारूँ।
अपनी जानी एक-एक रेखा पहचानूँ
चेहरे की, आँखों की - अंतर्मन की"आउट- हमारी साझे की अनगिन स्मृतियों की;
तुम्हें निहारूँ..."
उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ किस कविता की है?
1
कलगी बाजरे की
2
हरी घास पर क्षण भर
3
यह दीप अकेला
4
कितनी नावों मने कितनी बार
5
अनुत्तरित प्रश्न