Comprehension Passage

निम्नलिखित अवतरण को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

उपन्यास की ओर मोहन राकेश अपेक्षाकृत काफी बाद में आए। जब उनका 'अंधेरे बंद कमरे' (1961) प्रकाशित हुआ, नई-कहानी आंदोलन के एक प्रमुख सूत्रधार के रूप में वे पर्याप्त ख्याति पा चुके थे। तब तक उनका प्रसिद्ध नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' भी प्रकाशन और मंचन के बाद, उन्हें नाटककार के रूप में स्थापित कर चुका था। 'अकेलेपन की यंत्रणा' मोहन राकेश की प्रिय थीम रही है। घर-परिवार से छिटक कर वे बार-बार उसके प्रति गहरी ललक के साथ आकृष्ट होते हैं। अपने असामयिक निधन के कारण अपने संक्षिप्त रचना-काल में उन्होंने तीन उपन्यास लिखे - 'अंधेरे बंद कमरे' के बाद 'न आने वाला कल' (1968) और उनके निधन से कुछ पूर्व प्रकाशित, 'अंतराल' (1972)। कश्मीर के हांजियों के ऊपर लिखा गया उनका उपन्यास 'कांपता हुआ दरिया' धारावाहिक रूप से 'नई कहानियाँ' में प्रकाशित हुआ था, लेकिन वह पूर्ण नहीं हुआ। पारिवारिक बिखराव के परिणामस्वरूप उनके भटकाव को ही वह एक दूसरे ढंग से संकेतित करता है। अपने लेखन में मोहन राकेश सारी आत्मपरकता के बावजूद, 'परिवार', 'घर' और 'विवाह' जैसी संस्थाओं के संपूर्ण निषेध तक नहीं जाते। लेकिन इन्हें वे अपनी इच्छा और शर्तों के अनुरूप ढालना चाहकर अपने ढंग से जीना अवश्य चाहते हैं। आकांक्षा और हताशा का यह तनाव उनके साहित्य में सर्वत्र व्याप्त है। 'अंधेरे बंद कमरे' में नीलिमा और हरबंस का टूटता बिखरता हुआ पारिवारिक और दाम्पत्य जीवन कला, प्रेम, और स्वतंत्रता जैसे कुछ अन्य प्रत्ययों को भी समेट कर चलता है।

मोहन राकेश किस साहित्यिक आंदोलन के सूत्रधार माने जाते हैं?

1
अकहानी
2
नई कहानी
3
सचेतन कहानी
4
नई कविता

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation