दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए ।
अपने जीवन के कठिनतम समय में भी फालके फिल्म बनाने की इस नई तलाश में जुटे रहे। हर दिन कोई न कोई प्रयोग करते। लंदन से छपनेवाली सिनेमा संबंधी पत्रिकाएँ मँगाने लगे। धीरे धीरे घर की चीजें बिकने लगीं। उनकी जगह सिनेमा उपकरणों की मूल्य सूचियाँ, सिनेमा संबंधी पुस्तकें और प्रयोगों की सामग्री का अंबार लगने लगा। वह लगातार अपने प्रयोगों में जुटे रहे। अगले छह महीने केवल तीन घंटे सोना ही नसीब हुआ। लगातार फिल्में देखने अनिद्रा और प्रयोगों में जुटे रहने से उनकी आँखें थकने लगीं और दिखना लगभग बंद हो गया। आँखों के कार्निया में अल्सर हो गया था। एक वर्ष तक डॉक्टर प्रभाकर के इलाज के बाद आँखों में रोशनी वापिस लौटी। बीमारी के दौरान ही उन्होंने अपनी कला के प्रदर्शन का सही तरीका खोज लिया था। बीमारी से उठने के बाद उन्होंने एक मटर का दाना खुले गमले में बो दिया और धैर्यपूर्वक उसके अंकुरण और विकसित होने के चित्र लेने लगे। एक दिन जब पौधा पूरा उग आया तो फालके की पहली फिल्म 'मटर के पौधे का विकास' भी बनकर तैयार हो गई। इस फिल्म को देखने के बाद एक व्यापारी मित्र नाडकर्णी ने सूद पर रकम देने का प्रस्ताव रखा ताकि लंदन जाकर फिल्म संबंधी उपकरण लाए जा सकें।