दिए गए गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
दिल्ली सल्तनत के शासक फिरोज़शाह तुगलक़ ने अनेक ऐसे करों को समाप्त कर दिया जिनके भुगतान के लिए व्यापारियों को काफी कष्ट भोगना पड़ता था। इनमें से मुख्य थे 'दलाल-ए-बाज़ारहा' अर्थात क्रय-विक्रय पर लगने वाला कर तथा 'चुंगी-ए-गल्लाह' अर्थात अनाजों पर लगने वाला कर । सुल्तान ने अनेक नगर बसाए, नहरें खुदवाईं तथा उद्यान लगवाए जिससे व्यापारिक कार्यों में पर्याप्त वृद्धि हुई। उसके काल में आइनुलमुल्क मुल्तानी द्वारा लिखित इंशा-ए-माहरु से पता चलता है कि अधिकारियों को पत्राचार में किसी भी प्रकार से देरी करने की आज्ञा न थी क्योंकि इससे व्यापारियों के हितों पर बुरा प्रभाव पड़ता था। अफीफ ने अपनी तारीखे- फिरोज़शाही में इस काल में व्यापारियों के काफिलों को दूर देशों में ले जाने का वर्णन किया है। तारीख-ए-सिंध से हमें सिंध से के शासक के व्यापारियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख का पता चलता है। मालवा के शासक महमूद ख़लजी को अपने राज्य में जंगलों को साफ कराने तथा मार्गों को चोरों, डाकुओं तथा जंग़ली जानवरों से सुरक्षित रखने का श्रेय प्राप्त है। गुजरात के शासकों ने भी व्यापारिक प्रगति-संबंधी कार्यों के प्रति रुचि दिखाई थी। सुल्तान अहमदशाह ने 1412 ई. में अहमदाबाद नगर की स्थापना की जिसकी ख्याति शीघ्र ही अरब व चीन में पहुँच गई। 1426 में गुजरात की सीमा पर अहमदनगर की स्थापना हुई। मिरात-ए-सिकंदरी नामक पुस्तक में गुजरात के सुल्तान महमूद बेगड़ा के राज्य की सुख-समृद्धि का अच्छा-खासा वर्णन है।