Comprehension Passage
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही / सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।

आज के शिक्षाक्रम में चरित्र का गठन का कोई स्थान नही है, और न उसे कोई महत्व दिया जाता है। हमारी संस्कृति में गुरु और शिष्य का सम्बन्ध बहुत ही सुंदर और मीठा हुआ करता था। इसका कारण यही था कि दोनों का एक दूसरे पर विश्वास हुआ करता था। गुरु शिष्यों को पुत्रवत मानते थे। उन पर स्नेह करते थे। शिष्य गुरु को पितातुल्य और विश्वसनीय समझते थे। गुरु का शिष्य के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा करता था और गुरु और शिष्य के बीच व्यापारिक सम्बन्ध जिसमे पैसे के बदले कुछ पुस्तके पढ़ा देने मात्र का एक संपर्क होता है, न रहकर आध्यात्मिक सम्बन्ध हो जाता था जो घनिष्ठ हुए बिना नही रह सकता था।
आज आये दिन समाचार पत्रों में पढने को मिलता है कि कही विद्यार्थियों ने शिक्षको के विरुद्ध हड़ताल कर दी तो कही शिक्षको में भी दल - बंदियाँ हो गई और विद्यार्थी भी कुछ एक दल में शामिल हो गये तथा एक या दूसरे का समर्थन करने लगे। हाल ही में एक भयंकर दुर्घटना भी पढने में आई कि शिक्षक की परीक्षा संबंधी कड़ाई करने से असंतुष्ट होकर कुछ विद्यार्थियों ने शिक्षक के ही प्राण ले लिए। यदि कोई स्कूल का विद्यार्थी ऐसी बात करे तो वह समझ में आ सकती है पर जब किसी यूनिवर्सिटी या कॉलेज का विद्यार्थी ऐसे काम करता है तो यह चिंता का विषय हो जाता है। जहाँ तक समझ में आता है, इसका मौलिक कारण चरित्र गठन पर ध्यान न देना और छात्रो पर शिक्षक वर्ग के नैतिक प्रभाव का न होना ही है। यह समस्या साधारणतया सारे देश में विद्यमान है।

देश में शिक्षा से सम्बंधित किस समस्या पर ध्यान खींचा गया है -

1
विद्यार्थियों की हडताल करने की समस्या पर 
2
बेरोजगारों की समस्या पर 
3
शिक्षा में नैतिकता के अभाव की समस्या पर 
4
शिक्षको के द्वारा की जाने वाली दलबंदियो की समस्या 

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