साहसी मनुष्य का जीवन ही सच्चा जीवन होता है। साहसी मनुष्य अपने उद्देश्य के लिए बढ़ते रहते हैं। वास्तव में साहसी लोग ही संसार की शक्ति होते हैं। साहसी लोग अपने मार्ग पर अकेले ही बढ़ते हैं, जैसे जंगल में शेर अकेला रहता है। डरपोक लोग ही भेड़ों की तरह झुंड बनाकर रहते हैं।
संकट झेलना ही जीवन का स्तर दिखाता है। जो संकटों से बचता है वह वास्तविक जीवन से अनभिज्ञ रहता है। जीवन में संकटों का सामना करना एक पूंजी है। जो इस पूंजी को जितनी मात्रा में लगाता है उसी मात्रा में उसका फल पाता है। जीवन को अनंत मानकर आगे बढ़ने वाला मनुष्य ही जीवन के रहस्य को प्राप्त कर सकता है। जीवन का साधक थोड़े से सुकून से संतुष्ट नहीं होता बल्कि वह हिम्मत से सबसे ऊंची चोटी का फल तोड़कर खाना चाहता है। सागर के अंदर गोता लगाकर तल से मोती पाना चाहता है। उसके लिए दुर्लभ कुछ भी नहीं है। वह जंगल में भी अपना मार्ग बना ही लेता है।