निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प चुनिए-
उत्कर्ष एक कुशाग्र विद्यार्थी था, जो हमेशा ज्ञान की खोज में रहता था। वह एक छोटे से गाँव में रहता था जहाँ नारियल के ऊँचे-ऊँचे वृक्ष चारों ओर फैले हुए थे। उत्कर्ष को पेड़-पौधों से विशेष प्रेम था और वह उनकी देखभाल बड़ी लगन से करता था।एक दिन गाँव में एक अनजान व्यक्ति आया। वह व्यक्ति देखने में अलबेला लग रहा था, और उसकी अजीब सी वेशभूषा ने गाँव वालों को तुरन्त आकर्षित किया। उस व्यक्ति ने गाँव के प्रधान से मिलने की इच्छा जताई और प्रधान के पास जाकर कहा, "मैं एक साधु हूँ और आपकी मदद करने के लिए यहाँ आया हूँ।"गाँव वालों के मन में उस अनजान व्यक्ति के प्रति संदेह था, लेकिन उत्कर्ष उसकी बातों से प्रभावित हो गया। प्रधान ने साधु को एक सप्ताह तक गाँव में रहने की अनुमति दी।साधु गाँव के एक पुराने मंदिर में ठहर गया और लोगों की सेवा करने लगा। उसने गाँव वालों के बीच आलस्य को दूर करने और परिश्रम को बढ़ावा देने के लिए प्रेरणा दी। साधु की उपकर मानने वाला गाँव उसे 'दानवीर' कहने लगा।एक दिन मंदिर के पास बने नारियल के वृक्षों पर एक विषधर साँप आ गया। साँप ने मंदिर में जाना शुरू कर दिया, जिससे गाँव वालों में भय का माहौल पैदा हो गया। उत्कर्ष ने साधु को सारी घटना बताई। साधु ने उत्कर्ष से कहा, "तुम रातभर नहीं सोया करोगे और इस वृक्ष की पहरेदारी करोगे ताकि साँप तुम्हारे अधिकार क्षेत्र में ना आए।"उत्कर्ष रातभर जागता और वृक्ष के नीचे बैठकर पहरा देता। इसी बीच साधु ने गाँव वालों को साँप से छुटकारा दिलाने का उपाय बताया। उत्कर्ष ने गाँव वालों के साथ मिलकर उस उपाय को तुरन्त अमल में लाया और कुछ ही दिनों में साँप को पकड़ लिया गया।साधु ने गाँव वालों को उनके सत्कर्म और एकता के लिए सराहा। उत्कर्ष की मेहनत और जागरूकता के कारण गाँव वाले उसे बहुत स्वीकारने लगे। उसने न केवल अपने कार्य से गाँव का उत्कर्ष किया बल्कि उसकी विशेषताएँ गाँव के लिए प्रेरणा स्रोत बन गईं।
इस प्रकार, उत्कर्ष एक साधारण विद्यार्थी से गाँव का आदर्श बन गया और सबका चहेता भी। उसने सिद्ध कर दिया कि निस्वार्थ सेवा और परिश्रम से किसी भी बुराई को दूर किया जा सकता है, और यह बात गाँव में उपरोक्त घटना से सदा के लिए प्रमाणित हो गई।