निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प चुनिए-
मदन काली पतलून पहनकर खेलने आया तो सबने उसकी ओर देखा। वह न केवल अपने नए पहनावे में अलग दिख रहा था, बल्कि उत्साहित भी नजर आ रहा था। मदन की यह पतलून कुछ अधिक पतली और छोटी थी, परंतु यह उसे बहुत पसंद थी। उसके पास एक छोटा सा बौना दोस्त भी था, जिसका नाम सोम था। सोम और मदन अच्छे मित्र थे और अक्सर साथ खेलते थे।
मदन के बौने मित्र सोम को देखकर, मदन के पड़ोसी बुजुर्ग उसे टोकते थे, "बचपन गया तो क्या हुआ, लेकिन बुढ़ापा अभिशाप नहीं बनना चाहिए।" वे यह कहते हुए हँसते थे कि मदन और उसके मित्र उम्र से विभक्त जरुर हैं, परंतु पूरे ह्रदय से मित्र हैं। सोम और मदन एक दूसरे के प्रति गहरे ममत्व के भाव रखते थे।
एक दिन, मदन की बीबी ने उसे कहा, "तुम जयपुर आज जाओगे। वहाँ एक महत्वपूर्ण काम है, जिसे तुम्हें निपटाना होगा।" मदन को जाने में कोई दिक्कत नहीं थी, बस उसे समय का ध्यान रखना था। वह राम की तरह तेज चलना चाहता था ताकि गाड़ी पकड़ सके, परंतु जिस तरह राम बहुत तेज चला परंतु वह गाड़ी नहीं पकड़ सका, मदन को भी समय पर गाड़ी पकड़ने का संकट लग रहा था।
मदन ने अपनी जोड़ी के बड़े भाई को देखा, जिसे सब दीर्घकाय कहते थे, वह ज्यों का त्यों खड़ा देखता रहा। मदन उन्हें देखकर समझ गया कि कभी-कभी बड़ी देहयष्टि या बड़े शरीर वाला होने से कुछ नहीं होता, बल्कि समय पर काम करना महत्वपूर्ण होता है।
रात्रि का समापन हो चुका था और अब सुबह के उजाले में मदन का मानस देशांतर की पहले अनुभव से भरा हुआ था। वह पहली बार इतनी दूर अकेले यात्रा करने वाला था। रेलवे स्टेशन के रास्ते में उसने एक मैना को देखा, जो चहचहा रही थी। वह उसकी आवाज सुनकर बहुत खुश हुआ और उसकी यात्रा के लिए यह एक शगुन मान लिया।
मदन की यात्रा द्वारा एक छोटा लघु कथा बन गई। उसने कई पात्रों और महत्वपूर्ण अनुभवों से भरी कहानी लिखी थी। वह अब यात्रा के अंत में सब कुछ संशोधित कर सोच रहा था कि उसने जीवन के अनेक पहलुओं को कितनी गहराई से समझा है।