निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प चुनिए-
सूरज की पहली किरण के साथ ही निशा का अंधेरा समाप्त हो गया। चतुरानन छात्र, रमेश, अपनी नीयत से हमेशा कुशाग्रता के लिए प्रसिद्ध था। उसने सदैव यही निश्चय किया था कि अपने देश की सेवा करना ही उसका लक्ष्य होगा। कक्षा में उनकी कुशाग्रता के किस्से प्रसिद्ध थे, और अभी परीक्षा हो गयी थी जिसमें उसने उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किया था।रमेश अक्सर पहाड़ों पर जाता था, जहाँ वह पत्थरों पर चढ़कर अपने विचारों को स्पष्टता से सोच सकता था। एक दिन, वह वहाँ बैठा था, जब अचानक मेघ घिर आए और बरसात होने लगी। उसने देखा कि प्रकृति कितनी सुंदर होती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उसे कितना निरगुण भी बनना पड़ता है।रमेश को अपने परिवार और शिक्षकों से निरंतर मार्गदर्शन मिलता रहा था, जिससे उसकी नीयत और अधिक सशक्त होती चली गई। उसका मानना था कि जीवन में पाठ के रूप में प्रकृति से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। जीवन का सफर जैसे चाँद के अलग-अलग पहलुओं की तरह होता है- कभी उज्ज्वल तो कभी धुंधला।रमेश की प्रेरणा उसके पिता, जो पुरुषोत्तम व्यवहार और उच्चतम नैतिक मूल्यों के प्रतीक माने जाते थे, से मिलती रही है। उनके अद्वितीय आचरण ने रमेश को जीवन के अनगिनत पाठ दिए।रमेश का जीवन यह सिखाता है कि नकारात्मकता और निषेध को पीछे छोड़कर सतत मेहनत और सच्ची नीयत से ही सफल हुआ जा सकता है। हर चुनौती को अवसर की तरह स्वीकार कर, अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते रहना ही सच्ची कुशाग्रता का परिचायक है। अपने देश की सेवा करना ही उसका सर्वोच्च उद्देश्य था और इसके लिए वह हर संभव प्रयास करता रहा, जिससे उसे असीम खुशी मिलती थी।इस प्रकार, रमेश ने यह सिद्ध कर दिया कि निष्ठा, नीयत और निरन्तर प्रयास से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है, चाहे राह में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं