Comprehension Passage
निर्देश:
ओ मेरे आदर्शवादी मन
ओ मेरे सिद्धांतवादी मन
अब तक क्या किया ?
जीवन क्या जिया ?
उदरम्भरि बन अनात्म बन गए
भूतों की शादी में कनात से तन गए ,
किसी व्यभिचारी के बन गए बिस्तर
दुखों के दागों को तमगों सा पहना
अपने ही ख्यालों में दिन रात रहना ,
असंगत बुद्धि व अकेले में सहना
ज़िन्दगी निष्क्रिय बन गयी तलघर
अब तक क्या किया
जीवन क्या जिया !!
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने किस पर व्यंग्य किया है ?
1
सामंतवादियों पर
2
सरकार पर
3
नेता लोगों पर
4
स्वार्थी लोगों पर
5
अनुत्तरित प्रश्न