अभ्यास आत्मविश्वास बढ़ाने का सर्वोत्तम साधन है। भगवान बुद्धि सभी को देता है किंतु जो लोग अभ्यास से अपनी बुद्धि बढ़ा देते हैं पर बुद्धिमान और चतुर कहलाते हैं। जो बुद्धि से काम नहीं लेते वे मूर्ख रह जाते हैं। जिस प्रकार बिखर पड़े लोहे को भी जंग लग जाती है इस प्रकार जिस अंग से हम काम लेते हैं वह शक्तिपूर्ण बन जाता है और जिस से काम नहीं लेते वह दुर्बल रह जाता है। प्रकृति द्वारा दी गई शक्तियों का उचित उपयोग करना ही अभ्यास है। इसे शक्तियों का विकास होता है.
बिना अभ्यास के सिद्धि प्राप्त नहीं होती। बिना अभ्यास के प्राप्त सिद्धि स्थिर भी नहीं रह पाती। विद्यार्थी कुछ दिनों के लिए व्याकरण को दोहराना छोड़ दे तो पढ़ा हुआ पाठ भी भूल जाता है। कभी-कभी बता रहे तो वह उसे सदा के लिए याद रहेगा। आप अभ्यास ही नहीं लगातार अभ्यास करिए।
केवल शिक्षा में ही नहीं, जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए अभ्यास करना अत्यंत आवश्यक है। अभ्यास से कार्य में कुशलता आती है एवं कठिनाइयां सरल हो जाती हैं। अभ्यास से समय की बचत होती है। अभ्यास से साधक के अनुभव में वृद्धि होती है, कमियां दूर हो जाती हैं और वह धीरे-धीरे पूर्णता की ओर अग्रसर होता जाता है।
आप शब्द का बहुवचन रूप होगा