निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प चुनिए-
एक सुंदर गाँव में एक बड़ा जंगल था जो हरियाली से भरपूर था। उस जंगल में एक नदी किनारे एक छोटा सा घर था। उस घर के अंदर का नजारा बड़ा ही निरर्थक था। कमरे में शूरू हुआ यह निरर्थक दृश्य तब सार्थक बन गया जब वहां की गतिविधियों पर ध्यान दिया गया।
कमरे के एक कोने में एक शिशु सो रहा था, उसकी मासूमियत मन को भा जाती थी। पास ही बालक गेंद से खेल रहा था, उसकी गेंद बार-बार दीवार से टकरा कर वापस उसके पास आ जाती थी। ऐसे में दीवार पर लगे रंगीन चित्र और खिलौनों से सजा कमरा सुंदरता प्रदान कर रहा था। एक छात्र पढ़ रहा था, उसके पढ़ाई में रूचि उसकी गंभीरता को दर्शाती थी।
कमरे के बाहर खुले मैदान में एक कटी हुई डोरी पड़ी थी, जिसे शिशु कभी सोकर उठेगा तो जरूर ढूंढेगा। समय कितना भी निरर्थक क्यों न लगे, जब उसमें बच्चों की हँसी-खुशी का रंग घुल जाए, तो सब सार्थक हो जाता है। एक खाने की मेज पर रोटी का टुकड़े पड़े थे और पास ही एक दीवार पर लिखा हुआ था, "जो सोवेगा सो खोवेगा, ज़ो जागेगा सो पावेगा।"
शायद यही जीवन का सार था, मेहनत और जागरूकता का महत्व। दक्षिण दिशा से आती सुबह की सुनहरी किरण ने पूरा घर उजाले से भर दिया। जैसे हर सुबह नए सपने, नए लक्ष्य लाती है।
अंततः, पूरे दृश्य को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि समय व्यर्थ नहीं जाता, अगर उसे सही दिशा में लगाया जाए। जीवन के छोटे-छोटे क्षण जो निरर्थक लग सकते हैं, वास्तव में सार्थक होते हैं, और यह गद्यान्श इसी जीवन के हर रंग को उभारता है।