निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प चुनिए-
चपाती की खुशबू रसोई में फैली हुई थी। माँ ने मसाला मिलाते हुए कहा, "आज कुछ खास दिन है।" मैंने पूछा, "क्या बात है माँ?" उन्होंने हँसते हुए जवाब दिया, "बस यूँ ही, दिल किया कि आज कुछ विशेष बनाऊँ।"
मैं कमरे में बैठा था, थोड़ा निराशा के सागर में डूबा हुआ। मेरे मन में कतरन-कतरन विचार आते जा रहे थे। एक ओर कठोर वास्तविकता थी, तो दूसरी ओर माधुर्य की चाहत। माँ ने मेरी ओर देखकर कहा, "क्या हुआ बेटा, इतना कड़वा मुँह क्यों बना रखा है?"
रातभर जागने के बाद भी नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी। मैं बेड पर बैठकर उँगली से फर्श पर लकीरें खींच रहा था। माँ की बातें सुनकर मुझे थोड़ा गुस्सा आया, परंतु वह गुस्सा भी जल्द ही ठंडा हो गया। मुझे समझना पड़ा कि माँ का प्यार ही उनकी चिंता की जड़ है।
एक चतुष्पद जानवर, हमारा कुत्ता टॉमी, मेरे पास आकर बैठ गया। उसकी आँखों में वही निराशा थी, जो शायद मेरी निगाहों में भी थी। मैंने टॉमी के सिर पर हाथ फेरा और उसकी आँखों में देखा। उसने अपनी आँखें मेरी तरफ घुमाईं और मानो मेरी भावनाओं को समझते हुए मुझसे कुछ कहे बिना ही बहुत कुछ कह दिया।
मसाला तैयार हो चुका था और माँ ने चपाती को तवे पर डाल दिया। चपाती की खुशबू ने मेरे अंदर थोड़ी सी ऊर्जा भर दी। मैंने उठकर माँ की मदद करने का सोचा। "माँ, मैं आपकी मदद करूँ?" माँ ने मुस्कराते हुए कहा, "हाँ बेटा, आ जाओ।"
उस पल, मुझे महसूस हुआ कि कड़वा, कठोर जीवन भी प्रेम और माधुर्य के साथ मीठा हो सकता है। निराशा के बादल छँट रहे थे और एक नई आशा की किरण फूट रही थी। माँ के साथ समय बिताने से मन को एक अजीब सी शांति मिली। टॉमी भी हमारे चारों ओर खुश होकर घूम रहा था।
चपाती, मसाला और माँ का प्यार - तीनों ने मिलकर उस दिन को खास बना दिया। और मैं समझ गया कि जीवन की मिठास छोटे-छोटे पलों में ही छुपी होती है