निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प चुनिए-
गाँव के किनारे स्थित नदी के तट पर एक साधारण सा फकीर रहता था। उसकी नौका हमेशा तैयार रहती थी, ताकि वह जरूरतमंदों को नदी पार करने में मदद कर सके। फकीर का जीवन फल और फुलों के बीच गुज़रता। चारों दिशाओं में उसकी सेवा भावना की कहानियाँ फैली थीं, जैसे एक चर्तुभूज के चार कोने।
गाँव में एक वृद्ध मौलवी भी रहते थे, जिन्हे सब जनाब कह कर पुकारते। वह फकीर की तरह से गांव वालों की सेवा किया करते थे। जनाब मौलवी अक्सर फकीर से मिलकर कहानियाँ साझा करते और हर सुबह कमल के फूलवाड़ी में बैठकर चर्चा करते थे।
वहीं कुछ ठगों का एक गिरोह था, जिनका उद्देश्य केवल लोगों को धोखा देना और उनका सर्व लूटना था। उन्होनें एक दिन फकीर के पास जाकर उसकी गरीबी का मज़ाक उड़ाया, किंतु फकीर ने सरलता से उन्हें माफ कर दिया।
फकीर का जीवन राम और लक्ष्मण की कथाओं से प्रेरित था। वह उन्हीं के आदर्शों पर चलता और बच्चों को अक्सर इन से संबंधित पत्र लिखवाता। भले ही फकीर भुलक्कड़ था, लेकिन उसके ह्रदय की सच्चाई किसी मूल्य से कम नहीं थी।
गाँव वाले फकीर की बुद्धिमत्ता और मौलवी की शिक्षा से बेहद प्रसन्न थे। हालांकि कुछ ठग उनके नजदीकी आकर महौल को खराब करने की कोशिश करते रहते थे।
एक बार अत्याचारियों का एक दल गाँव में धावा बोला। उन्होंने गाँव में भयंकर तोड़-फोड़ की और फकीर की नौका भी तहस-नहस कर दी। पवन से भी तेज गति से फैलती यह खबर सुनकर मौलवी और गाँव वाले एकत्र हो गए।
फकीर ने बिना किसी डर के खड़ा होकर अत्याचारियों का सामना किया। उसके साहस और सेवा के प्रती ने ठगों का दिल बदल दिया। यह देखकर गाँव वालों ने उसकी खूब सराहना की।
अंतत: गाँव में शांति और सद्भाव का माहौल फिर से स्थापित हुआ। फकीर और मौलवी की सम्मिलित शिक्षाओं ने एक बार फिर से यह साबित किया कि सेवा, सच्चाई और साहस की शक्ति हमेशा अत्याचार पर विजय प्राप्त करती है।
यहाँ तक कि ठग भी अपने पुराने रास्ते छोड़, गाँव के भुलक्कड़ फकीर और जनाब मौलवी की शिक्षाओं पर चलने लगे। उस दिन के बाद गाँव में कुछ न कुछ अच्छा ही होता रहा।
दिए गए शब्द की संज्ञा ज्ञात कीजिए।
ठग