मेरी माँ कहती है कि जिस तरफ़ दुनिया चल रही है, हमें भी उसी तरफ़ चलना चाहिए। उसने कभी स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया, बल्कि खुद को उन्होंने मेरे अनुरूप बदला है। एक रूढ़िवादी परिवार से ऊँचा उठकर उन्होंने सोचा, जिया और हमें जीना सिखाया। मुझे यह कहते हुए ज़रा भी संकोच नहीं होता कि मेरे माता-पिता मुझसे कहीं ज्यादा आधुनिक विचारधारा वाले व्यक्ति हैं और मुझे उन पर गर्व है। मुझे लगता है कि अपने बच्चों के लिए हर माँ सबसे ज्यादा साहसी और निर्भीक होती है। वह सबसे ज्यादा तरक्कीपसंद होती है। वह नए ज़माने की माँ हो या पुराने ज़माने की, अपने बच्चों को वह तमाम बंधनों से मुक्त करना चाहती है और उन्हें आज़ाद परिंदों की तरह खुला आसमान देना चाहती है।
माँएँ अपनी फ़ितरत से ही तरक्कीपसंद होती हैं, क्योंकि वे बच्चे के साथ-साथ दोबारा विकसित होती हैं। यह बच्चे को पालने और उसे विकसित करने की उनकी मूल प्रवृत्ति है जो उन्हें अपनी आदतों और अपने मूल्यों को नए सिरे से गढ़ने के लिए प्रेरित करती है। आपने शायद गोर्की का उपन्यास ‘माँ’ पढ़ा हो। वह माँ अनपढ़ है, लेकिन इसके बावजूद वह समझ पाती है कि उसका बेटा क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है।