निम्न गद्यांश का अध्ययन कीजिए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प चुनिए-
भुवनेश्वर, जो अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, अपने आप में भिन्नताओं का एक अद्भुत मिश्रण है। इस शहर का हृदय सदैव धड़कता रहता है, जिसमें नौ रसों की परिपूर्णता विद्यमान है। चाहे वह खुशी का रस हो या शांति का, यहां के लोग प्रत्येक भावना को जीते हैं।
एक समय की बात है जब भुवनेश्वर में एक विवाहित जोड़ा रहता था, जिनका विवाह एक दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान पर आधारित था। परंतु समय के साथ, उनके रिश्ते में द्वेष का बीज अंकुरित हो गया। पति-पत्नी के बीच की खटास इतनी बढ़ गई कि वे एक दूसरे से विरक्त हो गए। रिश्तों की इस विरक्ति को समझना किसी कठिन परीक्षा से कम न था।
इस जोड़े की कहानी में 'तीर' का प्रतीकात्मक महत्व था। जैसे तीर का निशाना सही लगाना अत्यंत कठिन होता है, वैसे ही प्रेम और सामंजस्य को बनाए रखना भी एक कला है। इस कला को समझने के लिए उन्हें 'अष्टाध्यायी' जैसे गूढ़ ग्रंथों का अध्ययन करना पड़ा।
भुवनेश्वर के बाजार में, जहां कपड़े, कपूर और अन्य सामानों का व्यापार होता था, वे दोनों अक्सर मिलते थे। बाजार की चहलपहल के बीच, कभी-कभी उनकी निगाहें मिल जाती थीं, और वहां एक पल के लिए समय ठहर जाता था – 'पलक बिना झपकाए' उन पलों का अद्भुत दृश्य होता था।
इन सबके बीच, उन्होंने देखना शुरू किया कि उनके रिश्ते में विराजमान द्वेष का कारण खुद उनमें ही है। वे प्रागैतिहासिक मानसिकताओं से जुड़ी कई भ्रांतियाँ और मिथक पाले हुए थे, जिन्हें समय के साथ उन्हें छोड़ना होगा।
एक दिन, वे दोनों मंदिर में मिले और वहां से अपनी नई यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने समझ लिया कि रिश्तों में व्यय सिर्फ आर्थिक ही नहीं बल्कि भावनात्मक भी होता है। प्रेम में समर्पण और त्याग जरूरी है।
भुवनेश्वर की इस कहानी ने हमें सिखाया कि जीवन में भिन्न-भिन्न परिस्थितियों का सामना करते हुए, हृदय से निर्णय लेना और रिश्तों की परीक्षा को सफलता के साथ उत्तीर्ण करना ही सच्ची समझदारी है।बल्कि हमेशा प्रेम और सामंजस्य के तीर को सही दिशा में चलाने की आवश्यकता है।