Comprehension Passage
होरी कदम बढ़ाए चला जाता था। पगडंडी के दोनों ओर ऊख के पौधों की लहराती हुई हरियाली देख कर उसने मन में कहा - भगवान कहीं गौं से बरखा कर दे और डाँड़ी भी सुभीते से रहे, तो एक गाय जरूर लेगा। देसी गाएँ तो न दूध दें, न उनके बछवे ही किसी काम के हों। बहुत हुआ तो तेली के कोल्हू में चले। नहीं, वह पछाईं गाय लेगा। उसकी खूब सेवा करेगा। कुछ नहीं तो चार-पाँच सेर दूध होगा? ठाण भी बना ही लेंगे। गोबर दूध के लिए तरस-तरस रह जाता है। इस उमिर में न खाया-पिया, तो फिर कब खाएगा? साल-भर भी दूध पी ले, प्राण आ जाए तो देखने लायक हो जाए। बछवे भी अच्छे बैल निकलेंगे। दो सौ से कम की गोंई न होगी। फिर गऊ से ही तो द्वार की सोभा है। सबेरे-सबेरे गऊ के दर्सन हो जायँ तो क्या कहना! न जाने कब यह साध पूरी होगी, कब वह सुभ दिन आएगा!

सरकार ग्रामीण जनों हेतु सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार द्वारा समय-समय पर इस क्षेत्र में सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण कदम भी उठाए जाते रहे हैं। ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अनुदान दिए जाने से लेकर क्रियान्वयन एवं रखरखाव पहलुओं और भूजल पुनर्भरण हेतु भी कदम उठाए गए हैं। कुछ अन्य कदमों में वर्षा जल संचयन भी शामिल है जो कि बेहद महत्वपूर्ण पहलू है और ग्रामीण क्षेत्रों में सतत रूप से सुरक्षित पेयजल आपूर्ति में मददगार हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृत्रिम पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन ढांचे के निर्माण हेतु सरकारी मास्टर प्लान पर कार्य कर रही हैं भारत में ऐसी सफलता की कहानियों की भरमार है जो कि जल संचयन के हमारे प्राचीन परंपरागत ज्ञान और विवेक की तरफ ध्यान आकर्षित करती है। 2001 में तमिलनाडु सरकार ने हर परिवार के लिए वर्षा जल संरक्षण की आधारभूत संरचना रखना अनिवार्य कर दिया। बेंगलुरु और पुणे जैसे नगरों में भी इसके जैसा प्रयोग किया गया है जहां आवास समितियों द्वारा वर्षा जल संरक्षण अपेक्षित है। दूसरे राज्यों में भी इसी प्रकार के अनेक पहले शुरू हुई है। भूजल का दोहन भारत में एक मुख्य समस्या है इसे रोकने के लिए राज्य सरकारों द्वारा नियामक तंत्र की आवश्यकता है। गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में अत्यधिक कुओं की खुदाई पर प्रतिबंध लगना चाहिए। पेयजल आपूर्ति की योजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए पंचायती राज संस्थाओं की अधिक भागीदारी की जरूरत है। पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका अति न्यून है। ग्रामीण समुदायों,  गैर सरकारी संगठनों तथा सरकार की सुविधा दाता और सह वित्तपोषक के रूप में भागीदारी सफल रही है। हमें याद रखना चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता और पहुंच का दायरा बढ़ाने के लिए हमें ग्रामीण समुदायों के सक्रिय सहयोग से पानी के न्याय संगत संरक्षण और उपयोग हेतु हर प्रकार के प्रयास करने की आवश्यकता है।

"नहीं, वह अभी गाय लेकर गया है" वाक्य में कौन सा काल है?

1
संदिग्ध भूतकाल
2
सम्भाव्य भविष्यकाल
3
आसन्न भूतकाल
4
वर्तमान काल
5
अनुत्तरित प्रश्न

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation