Comprehension Passage
हर व्यक्ति के जीवन में एक बार तो ऐसा समय आता ही है जब उसे लगने लगता है कि सारी चीजें विरोध में हैं। वह किसी के लिए कितना भी अच्छा सोचे सामने वाले को गलत ही लगेगा। वह कितनी भी मेहनत कर ले उसे असफलता ही मिलेगी। ऐसे समय में उसके मस्तिष्क में नकारात्मक विचार ही घुमड़ते रहते हैं। जो निरंतर अविश्वास की बारिश करते हैं तथा निराशा में डुबो देते हैं। इस परिस्थिति में मनुष्य को सरल मार्ग दिखाई देता है आत्महत्या का। किन्तु आत्महत्या कर जीवन को विराम देना कोई समाधान नहीं है। यदि ऐसी स्थिति में कोई आगे बढ़कर हाथ थाम ले, कोई सहारा दे तब हो सकता है कि जीवन से निराश व्यक्ति का जीवन भी प्रकाशित हो जाए और ऐसा व्यक्ति अवसाद से मुक्त हो इतना बड़ा कार्य करे कि इतिहास ही रच दे, और लोग दाँतों तले अँगुली दबा लें। कहने का तात्पर्य है कि यदि हम किसी हताश-निराश व्यक्ति को प्रेरित करते हैं तो उसका मनोबल अवश्य बढ़ता है। उसका आत्मविश्वास जाग जाता है और यहीं से आरम्भ होता है असंभव को संभव कर दिखाना।

"वह कितनी भी मेहनत कर ले उसे असफलता ही मिलेगी।" वाक्य में कौन सा सर्वनाम है?

1
निश्चयवाचक सर्वनाम
2
अनिश्चयवाचक सर्वनाम
3
प्रश्नवाचक सर्वनाम
4
संबंधवाचक सर्वनाम
5
अनुत्तरित प्रश्न

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